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श्री गौडीय-कंठहार

यह ग्रन्थ श्रील भक्ति सिद्धान्त सरस्वती ठाकुर प्रभुपाद द्वारा अधिकांशतः उद्धरित श्लोकों को संग्रह है। शुद्ध-भक्ति सिद्धान्तपरक ये श्लोक विभिन्न वेदों, उपनिषदों, श्रीमद्भागवत और अन्य शास्त्रों से लिय गये हैं। तत्व-सिद्धान्त के अनुसार इस ग्रन्थ को 18 भागों में बांटा गया है।

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श्री गौडीय-गीतिगुच्छ

गौड़ीय वैष्णव आचार्यों द्वारा संस्कृत, हिंदी और बांग्ला भाषा में रचित भक्तिमयी भजन, गीत, प्रार्थना और कविताओं का ये अद्भुत संग्रह भक्ति पथ के साधक के लिए अवश्य ही उपयोगी होगा।

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श्रीदामोदराष्टकम

श्रीदामोदराष्टक स्त्रोत पद्मपुराण में नारद शौनकादि के संवाद में श्रीसत्यव्रत मुनि के द्वरा कहा गया है। श्रील सनातन गोस्वामीपाद जी ने इसकी टीका में कहा है कि यह स्त्रोत नित्यसिद्ध है एवं श्रीदामोदर-कृष्ण को आकर्षित करने में समर्थ है। वैष्णव-स्मृतिशास्त्र श्रीहरिभक्तिविलास में भी कार्तिक मास में प्रतिदिन श्रीराधादामोदर को पूजा-अर्चन एवं ‘श्रीदामोदरष्टक’ नामक स्त्रोत के पाठ का निर्देश दिया गया है।

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श्रीचैतन्य – शिक्षामृत

श्रीशचीनन्दन श्रीचैतन्यदेव ने श्रीधाम नवद्वीप मायापुर में अवतीर्ण होकर अपने पवित्र चरित्र और मधुर उपदेशों से जगत-जीवों को जो शिक्षा दी है, उसी का नाम श्रीचैतन्य-शिक्षामृत है। श्रील भक्तिविनोद ठाकुर जी ने श्रीमन् महाप्रभु जी की शिक्षाओं को मानव-जाति के परम कल्याण के लिए ही इस पुस्तक के रूप में करबद्ध किया है। ये उपदेश किसी एक धर्म अथवा सम्प्रदाय के लिए ही नहीं बल्कि कपट और कलह से परिपूर्ण इस कलियुग से त्रस्त समस्त मानव जाति के ही अति प्रासंगिक हैं। वेदों एवं श्रीमद्भागवत की सार स्वरूप ये शिक्षामृत ही इस भयानक भव-दावानल को बुझाने में सक्षम हैं।

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श्रीभजनरहस्य

‘श्री भजन रहस्य’ श्रील भक्तिविनोद ठाकुर द्वारा रचित है। अपने अनुगत साधकों के कल्याण एवं पथ-निर्देशन हेतु उन्होंने अपने भजन के गोपनीय रहस्यों को इस ग्रन्थ के रूप में संयोजित किया है।

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श्रीभागवतामृतकणा

श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर कृत यह ग्रन्थ श्रीलरूप गोस्वामी जी द्वारा रचित ग्रन्थ ‘लघु-भागवतामृत’ की सारांश टीका है। जिसमें श्रीलरूप गोस्वामी जी ने भगवान् श्रीकृष्ण के विभिन्न अंश और अवतारों का वर्णन किया है।

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अर्चन-दीपिका

अर्चन का अर्थ है पूजन और ‘अर्चन दीपिका’ का अर्थ है पूजन के समय ज्योतिर्मय दीपक। भक्ति के नौ अंगों में से एक है ‘श्रीभगवान् का पूजन-अर्चन’। इस पुस्तक के द्वारा हम श्रीभगवान् की अर्चन-पद्धति सीख सकते हैं।

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Bhagwad Gita

श्रीमद्भगवद्गीता का ये संस्करण अखिल भारतीय श्रीचैतन्य गौड़ीय मठ के द्वारा हिंदी भाषा में प्रकाशित शुद्ध भक्तिमयी व्याख्या है। इसमें कर्मशः मूल श्लोक, ठाकुर भक्तिविनोद कृत ‘रसिकरंजन’ मर्मानुवाद, अन्वय एवं श्रीविश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर जी की ‘सारार्थ वर्षिणी’ टीका (मूलतः संस्कृत भाषा में) का हिंदी भावानुवाद आदि प्रकाशित हुए हैं।

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Bhagwad-Updesh
Bhagavad-Gita

This profound translation of Srimad Bhagavad-Gita by Srila Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja is sure to inspire sincere students of bhakti in their practices. It is considered complimentary to the authoritative and popular Bhagavad-Gita As It Is by Srila A.C. Bhaktivedanta Svami Maharaja. This present edition contains the bhavanuvada of the Sarartha-varsini-tika (a shower of the essential meanings) of the illustrious Srila Visvanatha Cakravarti Thakura, which was originally penned in Sanskrit. His commentary has been further illuminated by Srila Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja’s Sarartha-varsini Prakasika-vrtti, which guides the reader into profound aspects of the siddhanta. Consequently, the innermost intentions of the Gita are revealed to the modern audience. Some of the brilliant Rasika-ranjana commentaries by Srila Bhaktivinoda Thakura, have been included within this Prakasika-vrtti.

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