Today's Updesh

नृसिंह-राम-कृष्णेषु षाड़ गुण्यं परिपूरितम्।
परावस्थास्तु ते तस्य दीपादुत्पन्नदीपवत्।।
(पद्म पुराण)

(शास्त्र में सम्पूर्णावस्थ को ‘परावस्थ’ कह कर निर्धारण किया है।)

नृसिंह, राम और कृष्ण में परिपूर्ण भाव से साठ गुण विद्यमान हैं। जिस प्रकार एक प्रदीप से अन्य प्रदीपों की उत्पत्ति होने पर भी सभी दीपक समान धर्मावलम्बी होते हैं, उसी प्रकार स्वयं भगवान श्री कृष्ण से राम और नृसिंह की अभिव्यक्ति होने पर भी तीनों ही साठ गुणों से परावस्थापन्न हैं।

श्री श्रीमद् भक्ति बल्लभ तीर्थ गोस्वामी महाराज का संक्षिप्त परिचय

‘ऊदाहरण उपदेश से श्रेष्ठ है’ – यही आपकी प्रचार-शैली थी। जो कोई भी आपके श्रेष्ठ व्यक्तित्व के संपर्क में आया उसने आपकी जीवों के प्रति करुणा, पूर्ण वैराग्य, पूर्ण सहिष्णुता, गहन आध्यात्मिक आनंद, श्री गुरु में अनन्य विश्वास और श्री चैतन्य महाप्रभु के प्रति पूर्ण भक्ति एवं समर्पण के भाव को स्पष्ट रूप से देखा। आप शास्त्रों के सिद्धांतों से बिंदुमात्र भी विचलित न होने के लिए जाने जाते हैं। आपके सभी के प्रति अनुरागशील स्वभाव और गुरु-वैष्णवों की सेवा के प्रति समर्पण जैसे गुणों के लिए आप कई गौड़ीय संस्थाओं के आचार्यों के लिए आदर्श हैं।

आज की तिथि - April 6, 2026

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प्रयाग तत्त्व

स्नान यात्रा के उपलक्ष में

किसकी सेवा सर्वश्रेष्ठ है ?

गृहस्थभक्तों को सदा सर्वदा

श्रील गदाधर पण्डित गोस्वामी की महिमा

❅───✧ Aacharya ✧───❅

श्रीरामानुजाचार्य

श्रील जीव गोस्वामी

श्रीधर पण्डित

श्रीमुकुन्द दत्त ठाकुर

गंगा माता गोस्वामीनी

श्रीबलदेव विद्याभूषण

श्रील भक्त्यालोक परमहंस महाराज

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गोविंद-भाष्य का लेखन

Message of Srila Prabhupad

भगवान श्रीरामचन्द्र

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बद्धजीव

अभ्यास-योग

बन्धन व शोक

श्रीकृष्ण के प्रति अहैतुकी अनन्य भक्ति

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जो भक्ति करता है वही श्रेष्ठ है

गुरु जी की कृपा दृष्टि सदैव हम पर है

उनकी अपूर्व ADJUSTMENT

भक्तों की भावना ही उनके लिए सर्वोपरि है

Gaudiya kanthahara

निगमकल्पतरोर्गलितं फलं
शुकमुखादमृतद्रवसंयुतम्।
पिबत भागवतं रसमलयं
मुहुरहो रसिका भुवि मनोदिः ॥ 3 ॥

हे विद्वान् और विचारशील पुरुषों, वैदिक साहित्य के कल्पवृक्ष के पके फल श्रीमद्भागवत का आनन्द लीजिए। यह श्रीशुकदेव गोस्वामी के मुख से निकला है। इसलिए यह फल और भी अधिक स्वादिष्ट हो गया है, यद्यपि इसका अमृतमय रस पहले से ही मुक्तात्माओं सहित सभी के लिए स्वादिष्ट था।

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अप्रैल 13, 2026

वरुथिनी एकादशी का व्रत।


अप्रैल 14, 2026

द्वादशी ,  प्रातः 9:33 से पहले पारण।