Today's Updesh

सेई भक्त धन्य, ये ना छाड़े प्रभुर्चरण, सेई प्रभु धान्य, ये ना छाड़े निज-जन।
वह भक्त धन्य है जो अपने स्वामी या प्रभु का आश्रय नहीं छोड़ता और वह स्वामी भी धन्य हैं जो अपने सेवक का परित्याग नहीं करता

(श्री चैतन्य चरित्रामृत अन्त्य-लीला 4.46)

श्री श्रीमद् भक्ति बल्लभ तीर्थ गोस्वामी महाराज का संक्षिप्त परिचय

‘ऊदाहरण उपदेश से श्रेष्ठ है’ – यही आपकी प्रचार-शैली थी। जो कोई भी आपके श्रेष्ठ व्यक्तित्व के संपर्क में आया उसने आपकी जीवों के प्रति करुणा, पूर्ण वैराग्य, पूर्ण सहिष्णुता, गहन आध्यात्मिक आनंद, श्री गुरु में अनन्य विश्वास और श्री चैतन्य महाप्रभु के प्रति पूर्ण भक्ति एवं समर्पण के भाव को स्पष्ट रूप से देखा। आप शास्त्रों के सिद्धांतों से बिंदुमात्र भी विचलित न होने के लिए जाने जाते हैं। आपके सभी के प्रति अनुरागशील स्वभाव और गुरु-वैष्णवों की सेवा के प्रति समर्पण जैसे गुणों के लिए आप कई गौड़ीय संस्थाओं के आचार्यों के लिए आदर्श हैं।

आज की तिथि - March 31, 2026

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प्रयाग तत्त्व

स्नान यात्रा के उपलक्ष में

किसकी सेवा सर्वश्रेष्ठ है ?

गृहस्थभक्तों को सदा सर्वदा

श्रील गदाधर पण्डित गोस्वामी की महिमा

❅───✧ Aacharya ✧───❅

श्रीरामानुजाचार्य

श्रील जीव गोस्वामी

श्रीधर पण्डित

श्रीमुकुन्द दत्त ठाकुर

गंगा माता गोस्वामीनी

श्रीबलदेव विद्याभूषण

श्रील भक्त्यालोक परमहंस महाराज

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गोविंद-भाष्य का लेखन

Message of Srila Prabhupad

भगवान श्रीरामचन्द्र

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बद्धजीव

अभ्यास-योग

बन्धन व शोक

श्रीकृष्ण के प्रति अहैतुकी अनन्य भक्ति

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जो भक्ति करता है वही श्रेष्ठ है

गुरु जी की कृपा दृष्टि सदैव हम पर है

उनकी अपूर्व ADJUSTMENT

भक्तों की भावना ही उनके लिए सर्वोपरि है

Gaudiya kanthahara

श्रीलप्रभुपाद

संसार तृणाच्छादित कूप (घास से ढके हुए कुँए) के समान है । इस संसारकूप में एक बार गिर जाने पर, फिर इससे बाहर निकलना बहुत ही कठिन है । भगवान की कृपा के बिना केवल अपनी चेष्टा से कोई भी इस संसारकूप से बाहर नहीं निकल सकता । हम लोग कृष्ण के दास हैं, इस बात को भूलते ही हमें माया का दास होना पड़ेगा । भगवान की सेवा ही भक्ति है और भोग की इच्छा अभक्ति । प्रणिपात, परिप्रश्न तथा सेवावृत्ति के साथ गुरु - वैष्णवों से कृष्ण की कथाओं का श्रवण ही इस अभक्ति को परित्याग करने का एकमात्र उपाय है । तभी संसार करने की प्रवृत्ति दूर होगी और श्रीकृष्णसंकीर्तन में रुचि होगी ।

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मार्च 29, 2026

श्रीकामदा एकादशी का व्रत।


मार्च 30, 2026

द्वादशी ,  प्रातः 7:38 से पहले पारण।