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  • – एकादशी-व्रत पारण मन्त्र– तव प्रसाद-स्वीकारात् कृतं यत् पारणं मया। व्रतेनानेन सन्तुष्टः स्वस्तिं भक्तिं प्रयच्छ मे॥
  • Glories of Srila Kashisvara Pandit

    Ishvara Puri’s disciples were Kashisvara Brahmachari and Govinda. Being ordered by Ishvara Puri at the time of his departure from this world, they both arrived in Nilachala and met Mahāprabhu. The Lord considered them both to be His superiors because they had personally served His spiritual master, but He nevertheless accepted their service because it … Continue reading Glories of Srila Kashisvara Pandit


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    Sri Saranga Thakur

    Having been ordered by Mahāprabhu to take disciples, Saranga Ṭhākura decided that he would make a disciple of the first person that he met the following morning. As fate would have it, the next morning, a dead body washed up against him while he was taking bath in the Ganges. He revived the corpse and … Continue reading Sri Saranga Thakur


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    Sri Devananda Pandit

    Śrīla Bhakti Siddhānta Sarasvatī Gosvāmī Ṭhākura writes in this regard, “For Devananda Pandit of Kuliya, the fruit of service to the Vaiṣṇava was faith in Mahāprabhu’s lotus feet. Vakresvara Pandit’s visit to his house was the source of this auspiciousness. Although Devanand Pandit was a Smarta, he was a great scholar and self-controlled. He studied … Continue reading Sri Devananda Pandit


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    Sri Lochan Das Thakur

    When Lochan Das arrived in Amedpur, he was unable to remember where his in-lows house was, since it had been so long since he had visited. He asked a young girl in the street for directions, addressing her as ‘mā’, or ‘mother’. When he arrived at his in-laws’ house, he found out that the girl … Continue reading Sri Lochan Das Thakur


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    श्रीवास पण्डित

    “पंचतत्त्वात्माकं कृष्णं भक्तरूप स्वरूपकम् । भक्तावतारं भक्ताख्यं नमामि भक्त शक्तिकम् ॥” (श्रीस्वरूप दामोदर गोस्वामी के कड़चा से उद्धृत) पंचतत्त्वात्मक श्रीकृष्ण को अर्थात् श्रीकृष्ण के (1) भक्तरूप,(2) भक्त स्वरूप, (3) भक्तावतार, (4) भक्त और (5) भक्त शक्ति को मैं प्रणाम करता हूँ ।     शक्तिमान वस्तु पाँच विभिन्न प्रकार के लीला परिचय से इन पाँच तत्वों … Continue reading श्रीवास पण्डित


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    श्री वक्रेश्वरपण्डित

    श्री कृष्ण लीला में चक्रव्यूह के अन्तर्गत जो  अनिरुद्ध हैं, वे ही गौर लीला में श्री वक्रेश्वरपण्डित के रूप में आविर्भूत हुए। श्री राधिका जी की प्रिय सखी शशि रेखा भी श्री वक्रेश्वरपण्डित के अन्तर्प्रविष्ट हैं। बहुत से लोगों का कहना है कि त्रिवेणी के निकट गुप्तिपाड़ा में ही श्री वक्रेश्वरपण्डित का आविर्भाव स्थान है। … Continue reading श्री वक्रेश्वरपण्डित


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    श्रील बलदेव विद्याभूषण

    श्रील बलदेव विद्याभूषण प्रभु जी के आविर्भाव के समय और स्थान के सम्बन्ध में निश्चित रूप से कुछ नहीं जाना जाता। ऐतिहासिक लोग महापुरुषों के स्थान, समय के निर्धारण के सम्बन्ध में ध्यान दें तो इन सब विषयों का अभाव दूर हो सकता है। श्रील बलदेव विद्याभूषण प्रभु जी के पावन चरित्र के सम्बन्ध में … Continue reading श्रील बलदेव विद्याभूषण


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    श्रील जयदेव गोस्वामी

    श्रील जयदेव जी का आविर्भाव काल 11वीं व 12वीं शक शताब्दी में है। उनके आविर्भाव के स्थान के सम्बन्ध में मतभेद नज़र आता है। अधिकांश के मत में इनका आविर्भाव स्थान वीरभूम ज़िला के अन्तर्गत केन्दुबिल्व ग्राम में हुआ तथा किन्हीं के मत में उत्कल देश में तथा किन्हीं के मत में जयदेव जी का … Continue reading श्रील जयदेव गोस्वामी


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    Video Conference


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    15 मई (अक्षय-तृतीया 14 मई को अहोरात्र होने के कारण 15 मई को पालन की जायेगी।)
    अक्षय-तृतीया। श्रीश्रीजगन्नाथ देव जी की 21 दिवस-व्यापी चन्दन यात्रा आरम्भ। चार धाम के अन्तर्गत श्रीबद्रीनाथ जी के द्वार उद्बोधन। श्रीश्रील प्रभुपाद – अनुकम्पित त्रिदण्डिस्वामी श्रीमद् भक्ति सौध आश्रम गोस्वामी महाराज जी का आविर्भाव। श्रीश्री गौड़ीय वेदान्त समिति का 81वां स्थापना दिवस महोत्सव। श्रीश्री केशव व्रत समाप्त।

    मधुसूदन -29 दिन--23 मई, 2021
    मोहिनी एकादशी-उपवास। (एकादशी बिद्धा हेतु।) (द्वादशी- रविवार भोर 02:31 से रात्रि 12:24 बजे तक; तुलसी चयन निषेध)।

    मधुसूदन -29 दिन--25 मई, 2021
    श्रीश्रीनृसिंह-चतुर्दशी व्रत उपवास।

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