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  • सर्वमहागुणगण वैष्णव शरीरे। कृष्ण भक्ते कृष्णर गुण सकल संचारे। सेई सब गुण हय वैष्णव-लक्षण। सब कहा न याय करि दिग्दर्शन।। कृपालु, अकृत-द्रोह, सत्य-सार, सम। निर्दोष, वदान्य, मृदु, शुचि, अकिंचन।। सर्वोपकारक शांत, कृष्णैकशरण। अकाम, निरीह, स्थिर, विजित-षड्गुण। मित्भुक, अप्रमत, मानद, अमानी। गम्भीर, करुण, मैत्र, कवि, दक्ष, मौनी। कृष्ण भक्त के ये तमाम गुण हमें श्रील भक्ति विनोद ठाकुर जी के शुद्धभक्तिमय जीवन में परिपूर्ण रूप से प्रस्फुटित देखने को मिलते हैं। कृपालु, दयानिधि गौरहरि जी ने बद्ध जीवों पर जैसे नौ प्रकार से कृपा वर्षण की हैं, उनके निजजन श्रील भक्ति विनोद ठाकुर महाशय को भी वैसी ही दया को वितरण करते देखा जाता है।
  • साधुसंग में हिंसक प्राणी भी अहिंसक हो जाते हैं

    सुन्दरवन में बाघ सुअर सर्प आदि हिंसक और दुष्ट प्राणियों का वास है। वहाँ अधिक दिन रहने पर उसी प्रकार की हिंसा-मत्सरता के वशीभूत होना बहुत स्वाभाविक है।


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    श्रीमद्भगवतगीता

    आजकल नानाप्रकार के अप्रामाणिक व्यक्ति गीता का मनगढ़न्त भाष्य प्रकाशित कर रहे हैं, जिसमें सिद्धान्तहीन, स्वकपोलकल्पित चित्-जड़समन्वयवादरूप काल्पनिक मतवाद को धृष्टतापूर्वक प्रस्तुत किया गया है। इन भाष्यों में सनातन शुद्धाभक्ति को तुच्छ दिखलाने की चेष्टा की गई है। ऐसे अधिकांश भाष्यों में या तो कर्म अथवा मायावादरूप निर्विशेष ज्ञान को ही गीता का एकमात्र तात्पर्य बतलाया गया है। जिसे पढ़ – सुनकर साधारण कोमल श्रद्धालुजन पथभ्रष्ट हो रहे हैं।


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    अष्ट महाद्वादशी

    ब्रह्मवैवर्त्त पुराण में श्रीसुत – शौनक संवाद में अष्ट महाद्वादशी के संबंध में वर्णित हुआ है कि,


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    त्रिष्पृशा महाद्वादशी

    प्रथमतः एकादशी और उसके दूसरे पूरे दिन द्वादशी एवं रात्रि के अन्त में त्रयोदशी अर्थात् एत्यस्पर्श होने से वह ‘त्रिष्पृशा’ नाम से अभिहित होती है। हरि की विशेष प्रिय यह महापुण्य – विस्तारिणी तिथि को यत्नपूर्वक उपवास करना चाहिए। त्रिष्पृशा द्वादशी प्राप्त होने पर भी उसके पिछले दिन एकादशी को उपवासी रहने से उस पापाग्नि में समस्त कल्याण संपूर्ण रूप से दग्ध हो जाते हैं। इस व्रत का पारण त्रयोदशी को करना होता है।

    पद्मपुराण में श्रीसनत्कुमार –


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    मोक्षदा एकादशी

    महाराज युधिष्ठिर ने कहा-
    हे देवदेवेश! हे विष्णो! आपकी मैं वन्दना करता हूँ। आप त्रिलोक के सुखदाता, विश्वेश्वर, विश्वकर्त्ता और पुरुषोत्तम हैं। मेरा एक संशय है । अग्रहायण मास के शुक्ल पक्ष की जो एकादशी है, उसका नाम क्या है, विधि क्या है और कौन से देवता इस एकादशी को पूजित होते हैं, कृपया वह हमें बताएँ।


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    भक्तों की भावना ही उनके लिए सर्वोपरि है

    मई २०१० में, पंजाब से कुछ भक्त कोलकाता आए और उन्होंने श्रील गुरुदेव से प्रचार के लिए उत्तर भारत आने का अनुरोध किया। पहले, श्रील गुरुदेव प्रचार के लिए उत्तर भारत में वर्ष में कम से कम ४-५ महीने बिताते थे। किन्तु पिछले पांच वर्षों से वे उत्तर भारत के क्षेत्रों में (चिकित्सक से परामर्श करने के लिए नई दिल्ली और चंडीगढ़ के अतिरिक्त) नहीं गए। पंजाब में कई भक्त उनके दर्शन के लिए अतिशय उत्सुक थे।


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    विषय-वासनारूप चित्तेर विकार ।

    विषय-वासनारूप चित्तेर विकार । आमार हृदये भोग करे अनिवार ।। कत ये यतन आमि करिलाम हाय । ना गेल विकार बुझि शेषे प्राण जाय ।। ए घोर विकार मोरे करिल अस्थिर। शान्ति ना पाइल स्थान, अन्तर अधीर ।। श्रीरूप गोस्वामी मोरे कृपा वितरिया । उद्घारिबे कबे युक्तवैराग्य अर्पिया । कबे सनातन मोरे छाड़ाये विषय । … Continue reading विषय-वासनारूप चित्तेर विकार ।


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    कृष्ण नाम और कृष्ण मन्त्र

    -कृष्ण नाम और कृष्ण मन्त्र सर्वोत्तम होते हुए भी कृष्ण नाम में अपराध का विचार है। श्रीकृष्ण नाम के आभास से करोड़ों-करोड़ों जन्मों के पाप ध्वंस हो जाते हैं व मुक्ति प्राप्त होती है – ये सत्य है। किन्तु अपराध रहने से नामाभास भी नहीं होता। अपराधी पर कभी श्रीकृष्ण ने कृपा नहीं की। :- श्रील … Continue reading कृष्ण नाम और कृष्ण मन्त्र


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    Video Conference


    No Video Conference Scheduled at the Moment!

    4 दिसम्बर रविवार
    बंगाल, आसाम आदि पूर्व अंचल में आज मोक्षदा एकादशी-उपवास है। उत्तर एवं पश्चिम अंचल में आज त्रिस्पृशा महाद्वादशी उपवास है। (द्वादशी- रविवार सुबह 7:27 से सोमबार सुबह 6.55 तक तुलसी चयन निषेध)। गीता जयन्ती। श्रीश्रील प्रभुपादानुकम्पित त्रिदण्डिस्वामी श्रीमद् भक्ति कुसुम श्रमण गोस्वामी महाराज जी का तिरोभाव।

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