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  • मनुष्य जन्म अति दुर्लभ

    यहाँ जीव का अर्थ है, पशु-पक्षी आदि सभी प्राणी। 84 लाख प्रकार के प्राणी समुदाय हैं। विष्णुपुराण में वर्णित है-  जलजा नवलक्षाणि …..                   9 लाख प्रकार के जलचर प्राणी हैं, 20 लाख प्रकार के पेड़-पोधै, 11 लाख प्रकार के जीव-जंतु, 10 लाख प्रकार के पक्षी, 30 … Continue reading मनुष्य जन्म अति दुर्लभ


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    एक साधू को पहचानने की शास्त्र-वर्णित तीन कसौटियां हैं

    धन, स्त्री और मान-सम्मान पाने की इच्छा –एक साधू को पहचानने की शास्त्र-वर्णित तीन कसौटियां हैं : यदि कोई वैष्णव गुरु पथ-भ्रष्ट हो जाए तो यह बहुत दुर्भाग्य की बात है। ऐसा बहुत कम देखा जाता है, लेकिन कभी-कभी ऐसा हो जाता है। आमतौर पर पथ-भ्रष्ट होने के लक्षण तीन अलग-अलग वर्ग में देखे जाते … Continue reading एक साधू को पहचानने की शास्त्र-वर्णित तीन कसौटियां हैं


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    श्रीमन् महाप्रभु का निर्देश है कि ‘लखपति’ होना ही होगा।

    प्रतिदिन बिना चूके प्रतिज्ञापूर्वक श्रीनाम संख्या को पूरा करना। श्रीमन्महाप्रभु का निर्देश है कि प्रतिदिन 1 लाख नाम ग्रहण (जप) कर लखपति होना होगा तभी भगवान तुम्हारे द्वारा अर्पित अन्न-जल आदि ग्रहण करेंगे।                     संसार में जितने भी अनुष्ठान हैं वह सभी श्रीहरिनाम में लगाने के … Continue reading श्रीमन् महाप्रभु का निर्देश है कि ‘लखपति’ होना ही होगा।


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    श्रीपाद जगबन्धु भक्तिरंजन प्रभु

    कलकत्ता बागबाजार स्थित श्रीगौड़ीय मठ प्रकाशित होने पर कलकत्ता निवासी श्रीयुक्त जगबन्धु दत्त महाशय कुछ दिनों से गौड़ीय मठ में आते रहे थे। प्रथम उन्होंने अभिज्ञ विषयी के दृष्टि से मठ के विभिन्न कार्य आदि का दर्शन करते थे। एक दिन श्रीपाद अनन्त वासुदेव प्रभु से कहा- जीवन में बहुत स्थानों पर वैष्णव का बहुत … Continue reading श्रीपाद जगबन्धु भक्तिरंजन प्रभु


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    ठाकुर श्रीसारंग दास

          “व्रजे नान्दीमुखी यासीत् साद्य, सारंग ठकुर:।      प्रह्लादो मन्यते कैश्चिन्मत पित्रा, स न मन्यते॥” (गौ.ग.दी.172)     श्रीशिवानन्द सेन के कनिष्ठ पुत्र कवि कर्णपुर जी ने स्वरचित श्रीगौर गणोद्देश दीपिका में इस प्रकार लिखा है – ब्रज में जो नान्दीमुखी थे, वही अब सारंग ठाकुर हैं। कोई-कोई महात्मा इन्हें प्रह्लाद कह कर मानते हैं … Continue reading ठाकुर श्रीसारंग दास


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    श्रील नरोतम ठाकुर

    श्रील नरोतम ठाकुर जी कृष्ण लीला में चम्पक मंजरी हैं । ये उनका सिद्ध परिचय हैं । श्री कृष्ण लीला की नित्यपार्षदा श्री रूप मंजरी की अनुगता चम्पक मंजरी जी हैं । जगत के जीवों का नित्य कल्याण करने के लिए नरोतम ठाकुर के रूप में आविर्भूत हुई थी । श्रील नरोतम ठाकुर जी राजसाही … Continue reading श्रील नरोतम ठाकुर


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    भगवद्-प्राप्ति के लिए सुनिश्चित पथ-निर्देशन हेतु श्रील गुरुदेव जी के विविध संवाद (2)

    सन् 1947 में ही श्रील गुरुदेव कलकत्ता के कालीघाट, 8 नं. हाजरा रोड़ पर स्थित मठ में अवस्थान करते थे। श्रीकृष्ण बल्लभ ब्रह्मचारीजी का, संसार त्याग करने के संकल्प से पहले, इसी मठ में ही श्रील गुरुदेवजी के साथ दूसरा साक्षात्कार हुआ था। श्रीकृष्ण बल्लभ ब्रह्मचारीजी ने श्रील गुरुदेवजी की महापुरुषोचित्त दिव्य कांति दर्शन करके, … Continue reading भगवद्-प्राप्ति के लिए सुनिश्चित पथ-निर्देशन हेतु श्रील गुरुदेव जी के विविध संवाद (2)


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    जब भगवान् जगन्नाथ जी ने स्वयं युद्ध क्षेत्र में आकर अपने भक्त की प्रतिज्ञा-रक्षा की।

    श्रीमन् महाप्रभु की लीला काल से पूर्व उड़ीसा राज्य के गजपति राजवंश में श्रीपुरुषोत्तम देव नामक एक राजा थे जोकि भगवान श्री जगन्नाथ देव के अनन्य-शरण भक्त थे। जब श्रीपुरुषोत्तम के साथ कांची नगर की राजकुमारी पद्मावती का विवाह निश्चित हुआ तो कांची के राजा वर को मिलने के लिए पुरी आये। जब कांची के … Continue reading जब भगवान् जगन्नाथ जी ने स्वयं युद्ध क्षेत्र में आकर अपने भक्त की प्रतिज्ञा-रक्षा की।


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    Video Conference


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    06 सितम्बर गुरुवार
    अन्नदा एकादशी उपवास। (द्वादशी समय – गुरुवार प्रातः 9.07 मिनट से शुक्रवार प्रातः 6.40 तक, तुलसी चयन निषेद )

    07 सितम्बर शुक्रवार
    प्रातः 6.40 से पहले पारण l

    17 सितम्बर सोमवार
    श्रीराधाष्टमी। (आविर्भाव दोपहर 12 बजे)

    21 सितम्बर शुक्रवार
    विजया महाद्वादशी उपवास। भगवान श्रीवामन देव जी का आविर्भाव। सायं काल के समय भगवान् श्री श्रीहरि का करवट बदलना महोत्सव। श्री जीव गोस्वामी जी का आविर्भाव l (द्वादशी समय – गुरुवार रात्रि 1.05 मिन्ट से शुक्रवार 3.07 तक, तुलसी चयन निषेद)

    22 सितम्बर शनिवार
    श्री श्रील सच्चिदानन्द भक्ति विनोद ठाकुर जी का आविर्भाव। प्रातः 9.30 से पहले पारण l

    25 सितम्बर मंगलवार
    श्रीविश्वरूप महोत्सव। पूर्णिमा।

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