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जो भक्ति करता है वही श्रेष्ठ है

जो भजन करता है वही उच्च कोटि का है; कोई सन्यासी है या गृहस्थ अथवा शिक्षित है या अशिक्षित, यह कोई मायने नहीं रखता। भगवद् सेवा में निष्ठा होने से ही कोई श्रेष्ठ कहलाता है। यही एक योग्यता है, और कुछ भी नहीं है।


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साधन भजन में अधिकार प्राप्त करने का उपाय और योग्यता

गुरु-वैष्णवगण परम दयालु हैं, उनकी अहेतुकी कृपा नि:स्वार्थ स्नेह ही जीव को भजन राज्य में अग्रसर कराने में समर्थ है। उनकी करुणा और शुभाशीष मनुष्य का विशेष साधन-सम्पद है। श्री भागवत के श्लोक में वज्र के समान कठोर पाषाण-हृदय, श्रीनाम ग्रहण द्वारा द्रवीभूत हो जाता है एवं अष्टसात्विक विकार आदि श्री नामाश्रयी के विशेष लक्षण … Continue reading साधन भजन में अधिकार प्राप्त करने का उपाय और योग्यता


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समय के साथ चलना साधक के लिए विशेष प्रयोजन

तुम क्रमशः निष्ठा के साथ सभी अनुष्ठानों को करने का प्रयास करना। समयनुवर्तिता ( समय के साथ चलना)


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भगवद्-प्राप्ति के लिए सुनिश्चित पथ-निर्देशन हेतु श्रील गुरुदेव जी के विविध संवाद (2)

सन् 1947 में ही श्रील गुरुदेव कलकत्ता के कालीघाट, 8 नं. हाजरा रोड़ पर स्थित मठ में अवस्थान करते थे। श्रीकृष्ण बल्लभ ब्रह्मचारीजी का, संसार त्याग करने के संकल्प से पहले, इसी मठ में ही श्रील गुरुदेवजी के साथ दूसरा साक्षात्कार हुआ था। श्रीकृष्ण बल्लभ ब्रह्मचारीजी ने श्रील गुरुदेवजी की महापुरुषोचित्त दिव्य कांति दर्शन करके, … Continue reading भगवद्-प्राप्ति के लिए सुनिश्चित पथ-निर्देशन हेतु श्रील गुरुदेव जी के विविध संवाद (2)


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अपराध रहित होने के लिए श्रीनाम और श्रीधाम से निष्कपट प्रार्थना प्रयोजन

भजन राज्य में अपराध भयानक दोष और त्रुटि है । श्रीनामपराध, धामापराध, सेवापराध साधन क्षेत्र में सब प्रकार से परित्यज्य है । परन्तु इन्हें कम समय में वर्जन करना अत्यन्त कठिन कार्य है । श्रीनाम-प्रभु और श्रीधाम से प्रार्थना करनी होती है, जिससे अपराध से निर्मुक्त होकर हम धामवास और श्रीनाम-ग्रहण कर सकें । श्रीगुरु-वैष्णवों … Continue reading अपराध रहित होने के लिए श्रीनाम और श्रीधाम से निष्कपट प्रार्थना प्रयोजन


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भगवद्-भक्त नित्य है

भगवान, भगवान के पार्षद एवं भगवद-भक्त जो लीला करते हैं, वह साधारण मनुष्य के समान नहीं होती। मनुष्य का जन्म होता है, मृत्यु होती है। हम संसार में जितने भी प्राणियों को देखते हैं, उन सबका जन्म होता है और फिर मृत्यु भी होती है। किन्तु भगवान इस संसार में आते हैं, भगवान प्रकट होते … Continue reading भगवद्-भक्त नित्य है


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प्रवृति बनाम निवृति मार्ग

दो प्रकार के मार्ग हैं – ‘प्रवृतिमार्ग’ वैवाहिक जीवन वाला मार्ग एवं ‘निवृतिमार्ग’ अथवा अविवाहित जीवन वाला अर्थात् त्याग वाला मार्ग। सामान्य लोग ‘प्रवृतिमार्ग’ के लिए योग्य होते हैं। वे लोग ही संन्यासी जीवन को बिताने में समर्थ होते हैं जिन्होंने अपने मन में ये बिठा लिया है कि वे कभी भी वैवाहिक जीवन में … Continue reading प्रवृति बनाम निवृति मार्ग


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श्रेष्ठतम साधन

श्रेष्ठतम साधन मनुष्य जीवन ही एक ऐसा अनमोल जीवन है जिसमें भगवद् भक्ति करने का सर्वोत्तम सुयोग हैI मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जिसे सद्-असद् का बोध है व जो सद् वस्तु भगवान की आराधना करके सब कुछ, यहाँ तक कि पूर्णतम्-वस्तु श्रीकृष्ण को भी प्राप्त कर सकता हैI श्रीमद् भागवत् में चित्त को … Continue reading श्रेष्ठतम साधन


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Video Conference


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मधुसुदन – 29 दिन, 24 अप्रैल - बुधवार
श्रीकृष्णदास बाबाजी महाराज का तिरोभाव।

25 अप्रैल गुरुवार
श्रीश्रील प्रभुपाद – पार्षद त्रिदण्डिस्वामी श्रीमद् भक्ति कुमुद सन्त गोस्वामी महाराज जी का आविर्भाव।

26 अप्रैल शुक्रवार
श्रील अभिराम ठाकुर जी का तिरोभाव।

28 अप्रैल रविवार
कृष्ण-नवमी। त्रिदण्डिस्वामी ॐ विष्णुपाद 108 श्री श्रीमद् भक्ति वल्लभ तीर्थ गोस्वामी महाराज जी का तिरोभाव।

29 अप्रैल सोमवार
श्रीश्रील वृन्दावन दास ठाकुर जी का तिरोभाव।

30 अप्रैल मंगलवार
वरूथिनी एकादशी-उपवास। (द्वादशी-मंगलवार रात्रि 11.36 से बुधवार रात्रि 1.21 बजे तक; तुलसी चयन निषेध) ।

1 मई - बुधवार
प्रातः 6.02 से 9.25 के मध्य पारण।

4 मई शनिवार
अमावस्या। श्रीश्रील गदाधर पण्डित प्रभु जी का आविर्भाव।

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