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Glories of Utpanna Ekadashi

This harikatha was spoken on Utpanna Ekadashi Tithi. The teachings are relevant to be heard on all the Ekadashi Tithis. Observing Ekadashi is one important limb of the 64 limbs of devotion. There is a scriptural prescript to do Upavasa on Ekadashi Tithi. Upavasa means to stay near Supreme Lord. For a conditioned soul it … Continue reading Glories of Utpanna Ekadashi


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श्रीपाद जगबन्धु भक्तिरंजन प्रभु

कलकत्ता बागबाजार स्थित श्रीगौड़ीय मठ प्रकाशित होने पर कलकत्ता निवासी श्रीयुक्त जगबन्धु दत्त महाशय कुछ दिनों से गौड़ीय मठ में आते रहे थे। प्रथम उन्होंने अभिज्ञ विषयी के दृष्टि से मठ के विभिन्न कार्य आदि का दर्शन करते थे। एक दिन श्रीपाद अनन्त वासुदेव प्रभु से कहा- जीवन में बहुत स्थानों पर वैष्णव का बहुत … Continue reading श्रीपाद जगबन्धु भक्तिरंजन प्रभु


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ठाकुर श्रीसारंग दास

      “व्रजे नान्दीमुखी यासीत् साद्य, सारंग ठकुर:।      प्रह्लादो मन्यते कैश्चिन्मत पित्रा, स न मन्यते॥” (गौ.ग.दी.172)     श्रीशिवानन्द सेन के कनिष्ठ पुत्र कवि कर्णपुर जी ने स्वरचित श्रीगौर गणोद्देश दीपिका में इस प्रकार लिखा है – ब्रज में जो नान्दीमुखी थे, वही अब सारंग ठाकुर हैं। कोई-कोई महात्मा इन्हें प्रह्लाद कह कर मानते हैं … Continue reading ठाकुर श्रीसारंग दास


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श्रील नरोतम ठाकुर

श्रील नरोतम ठाकुर जी कृष्ण लीला में चम्पक मंजरी हैं । ये उनका सिद्ध परिचय हैं । श्री कृष्ण लीला की नित्यपार्षदा श्री रूप मंजरी की अनुगता चम्पक मंजरी जी हैं । जगत के जीवों का नित्य कल्याण करने के लिए नरोतम ठाकुर के रूप में आविर्भूत हुई थी । श्रील नरोतम ठाकुर जी राजसाही … Continue reading श्रील नरोतम ठाकुर


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साधुसंग से भगवद्-तत्त्व की उपलब्धि

[कोलकाता स्थित मठ में श्रीकृष्ण-जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में आयोजित धर्म सभा में श्रील गुरुदेव जी की उपदेशवाणी का सारमर्म] श्रीकृष्ण की आराधना का वैशिष्ट्य समझने के लिये अच्छी तरह से ये जानना आवश्यक है कि श्रीकृष्ण कौन हैं, उनका स्वरूप क्या है? उनके व्यक्तित्व के ऊपर उनकी आराधना का वैशिष्ट्य निर्भर करता है। ‘कृष्ण’ शब्द … Continue reading साधुसंग से भगवद्-तत्त्व की उपलब्धि


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श्रीमन् चैतन्य महाप्रभु जी की शिक्षा

श्रीमन् चैतन्य महाप्रभु जी के नित्य पार्षद – षड् गोस्वामियों में से एक हैं श्रील रघुनाथ दास गोस्वामी। आपका जन्म गौड़देश के सप्तग्राम में एक बहुत बड़े धनी जमींदार के यहाँ हुआ। इन्होंने वैराग्य की चरम पराकाष्ठा का प्रदर्शन करते हुए इन्होंने इन्द्र के समान वैभव और अप्सरा के समान स्त्री का परित्याग करके श्रीमन् … Continue reading श्रीमन् चैतन्य महाप्रभु जी की शिक्षा


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विष्णु-वैष्णव सेवा ही परम धन है

‘ध्रुवानन्द’ नामक एक उदासीन वैष्णव एक बार पुरुषोत्तम क्षेत्र में गए थे। वहाँ पहुँच कर उन्हें श्रीजगन्नाथ देव को अपने हाथ से बनाकर भोग लगाने की प्रबल इच्छा हुई। श्रीजगन्नाथ देव ने स्वप्न में उनको गंगा किनारे “माहेश” नामक स्थान पर जाकर उनकी (श्रीजगन्नाथ की) प्रतिष्ठा कर अपने हाथ से रसोई करके भोग लगाने का … Continue reading विष्णु-वैष्णव सेवा ही परम धन है


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अपने दोषों का अनुभव

जब तक हम अपने भौतिक अहंकार को नहीं छोड़ेंगे, तब तक अपने जागतिक अभिमान एवं अपने दोषों को नष्ट करना हमारे लिए सम्भव नहीं होगा। स्वरूप-भ्रम ही जागतिक अभिमान की वृद्धि, धोखा देने की वृत्ति एवं इसी प्रकार के अन्य दोषों का मूल कारण है। बद्ध जीव के लिए सांसारिक अभिमान को छोड़ना आसान नहीं … Continue reading अपने दोषों का अनुभव


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3 दिसम्बर सोमवार
उत्पन्ना एकादशी उपवास। श्रीनरहरि सरकार ठाकुर जी का तिरोभाव। (द्वादशी समय – सोमवार दोपहर 2.08 से मंगलवार दोपहर 12.59 तक, तुलसी चयन निषेद)

04 दिसम्बर मंगलवार
प्रातः 9.41 से पहले पारण l श्री कालिय कृष्ण दास जी का तिरोभाव l

18 दिसम्बर मंगलवार
मोक्षदा एकादशी उपवास। (द्वादशी समय – बुधवार भोर 04.10 से गुरुवार भोर 03.50 तक, तुलसी चयन निषेद)

19 दिसम्बर बुधवार
प्रात: 10.06 से पहले पारण ।

01 जनवरी मंगलवार
सफला एकादशी उपवास । (द्वादशी समय – 11.54 से मंगलवार रात्रि 3.52 से बुधवार रात्रि 3.42 तक, तुलसी चयन निषेद) श्रीदेवानन्द पण्डित जी का तथा त्रिदण्डिस्वामी श्रीमद् भक्ति प्रकाश अरण्य महाराज जी का तिरोभाव।

02 जनवरी बुधवार
प्रातः 9.50 के बाद पारण l त्रिदण्डिस्वामी श्रीमद् भक्ति मयूख भागवत महाराज जी का तिरोभाव।

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