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  • वैष्णव संग, वैष्णव सेवा को छोड़कर जीव में मंगल का और कोई दूसरा रास्ता नहीं है। वैष्णव-सेवा के फल से एवं शास्त्रादि श्रवण के फल से जीवों में भगवान् की महिमा का अनुभव होता है और जीव भगवान् की उपासना में आग्रहान्वित होते हैं।
  • गुरु महिमा सुनकर मन झूमता है

    हाल ही में मैं बागबाज़ार गौड़ीय मठ में दर्शनों के लिए गया तो वहाँ पर मठ के एक जयेष्ठ ब्रह्मचारी प्रभु जी से सुन्दर वार्तालाप हुआ। जब उन्हें ज्ञात हुआ कि मैं श्रील भक्ति बल्लभ तीर्थ गोस्वामी महाराज जी का शिष्य हूँ तो उन्होंने गुरु महाराज जी की महिमा कीर्तन करना प्रारम्भ कर दिया।


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    समय के साथ चलना साधक के लिए विशेष प्रयोजन

    तुम क्रमशः निष्ठा के साथ सभी अनुष्ठानों को करने का प्रयास करना। समयनुवर्तिता ( समय के साथ चलना)


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    भगवान् की आराधना के लिये भगवद्-त्तत्व को समझने की ज़रूरत है।

    आसाम प्रचार-भ्रमण के समय श्रील गुरु महाराज जी गोहाटी में कुछ दिन रहे। उस समय आसाम के तत्कालीन मुख्यमन्त्री श्री गोपीनाथ बड़दलई जी के निवास पर भागवत पाठ की व्यवस्था हुई थी। श्रीगुरु महाराज जी के श्रीमुख से शुद्ध भक्ति सिद्धान्त सम्मत एवं सुयुक्तिपूर्ण श्रीमद् भागवत की अपूर्व ह्रदयग्राही व्याख्या सुनकर सभी श्रोता मुग्ध हो … Continue reading भगवान् की आराधना के लिये भगवद्-त्तत्व को समझने की ज़रूरत है।


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    श्रीपुरुषोत्तम मास

    (16 मई से 13 जून, 2018 तक) चन्द्र-मास की गणना तथा सूर्य-मास की गणना में सामंजस्य बनाये रखने के लि‌ए बत्तीस महीनों में एक महीना छोड़ देना पड़ता है। उसी मास का नाम है — अधिमास या अधिक मास । अंग्रेज़ी महिनों में हम कभी फरवरी को 28 का गिनते हैं तो कभी 29 का … Continue reading श्रीपुरुषोत्तम मास


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    क्या आत्मा-परमात्मा को किसी ने देखा है?

    क्या आत्मा-परमात्मा को किसी ने देखा है?; मौलवी साहब का सन्देह निस्तारण/         भगवद्-दर्शन की योग्यता सन् 1947 में श्रील गुरुदेव जी ने ग्वालपाड़ा एवं कामरूप ज़िले के भक्तों के आमन्त्रण पर जिन-जिन स्थानों पर शुभ पदार्पण किया उनमें बिजनी, भाटिपाड़ा, हाउली व बरपेटा इत्यादि स्थान उल्लेखनीय हैं। हाउली में जो धर्म सभा … Continue reading क्या आत्मा-परमात्मा को किसी ने देखा है?


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    श्रीमन् चैतन्य महाप्रभु जी की शिक्षा

    श्रीमन् चैतन्य महाप्रभु जी के नित्य पार्षद – षड् गोस्वामियों में से एक हैं श्रील रघुनाथ दास गोस्वामी। आपका जन्म गौड़देश के सप्तग्राम में एक बहुत बड़े धनी जमींदार के यहाँ हुआ। इन्होंने वैराग्य की चरम पराकाष्ठा का प्रदर्शन करते हुए इन्होंने इन्द्र के समान वैभव और अप्सरा के समान स्त्री का परित्याग करके श्रीमन् … Continue reading श्रीमन् चैतन्य महाप्रभु जी की शिक्षा


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    अपराध रहित होने के लिए श्रीनाम और श्रीधाम से निष्कपट प्रार्थना प्रयोजन

    भजन राज्य में अपराध भयानक दोष और त्रुटि है । श्रीनामपराध, धामापराध, सेवापराध साधन क्षेत्र में सब प्रकार से परित्यज्य है । परन्तु इन्हें कम समय में वर्जन करना अत्यन्त कठिन कार्य है । श्रीनाम-प्रभु और श्रीधाम से प्रार्थना करनी होती है, जिससे अपराध से निर्मुक्त होकर हम धामवास और श्रीनाम-ग्रहण कर सकें । श्रीगुरु-वैष्णवों … Continue reading अपराध रहित होने के लिए श्रीनाम और श्रीधाम से निष्कपट प्रार्थना प्रयोजन


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    भगवद्-भक्त नित्य है

    भगवान, भगवान के पार्षद एवं भगवद-भक्त जो लीला करते हैं, वह साधारण मनुष्य के समान नहीं होती। मनुष्य का जन्म होता है, मृत्यु होती है। हम संसार में जितने भी प्राणियों को देखते हैं, उन सबका जन्म होता है और फिर मृत्यु भी होती है। किन्तु भगवान इस संसार में आते हैं, भगवान प्रकट होते … Continue reading भगवद्-भक्त नित्य है


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    Video Conference


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    27 सितम्बर रविवार :-
    कामदा एकादशी – उपवास। (द्वादशी-रविवार रात्रि 9.32 से सोमवार रात्रि 9.48 तक; तुलसी चयन निषेध।)

    13 अक्तूबर मंगलवार :-
    कमला एकादशी – उपवास। (द्वादशी- मंगलवार सुबह 10.01 से बुधवार प्रातः 8.20 तक; तुलसी चयन निषेध।)

    16 अक्तूबर शुक्रवार :-
    अमावस्या। श्रीपुरुषोत्तम-व्रत समाप्त।

    27 अक्तूबर मंगलवार :-
    पापाकुंशा एकादशी-उपवास। (द्वादशी-मंगलवार दोपहर 12.21 से बुधवार दोपहर 1.40 तक; तुलसी चयन निषेध)।

    28 अक्तूबर बुधवार :-
    पूर्वाहण (सुबह) 9.29 से पहले पारण। श्रील रघुनाथ दास गोस्वामी, श्रील रघुनाथभट्ट गोस्वामी एवं श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी जी का तिरोभाव। द्वादशी आरम्भ पक्ष से कार्तिक व्रत, दामोदरव्रत, ऊर्ज्जाव्रत व नियमसेवा आरम्भ।

    31 अक्तूबर शनिवार :-
    पूर्णिमा। श्रीश्रीराधाकृष्ण जी का शारदीय रासयात्रा। पूर्णिमा आरम्भ पक्ष से कार्तिक व्रत, दामोदर व्रत, ऊर्ज्जाव्रत व नियमसेवा आरम्भ। श्रीमुरारी गुप्त जी का तिरोभाव। श्रीगौडीय वेदान्त समिति के प्रतिष्ठाता- नियामक श्रील प्रभुपाद –अंतरंग आचार्य – भास्कर जगद्गुरु ॐ विष्णुपाद 108 श्री श्रीमद् भक्ति प्रज्ञान केशव गोस्वामी महाराज जी का 52वां वर्ष पूर्ति विरह-महोत्सव।

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