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Srila Sanatana Goswami

ya rupa-manjari-preshtha purasiad rati-manjari socyate nama-bhedena lavanga-manjari budhaih sadya gaurabhinna-tanuh sarvaradhyah sanatanah tam eva pravishat karyan muni-ratnah sanatanah Rati Manjari, who was previously very dear to Rupa Manjari and was also known by some wise persons as Lavanga Manjari, has become the worshipable Sanatana, who is non-different from Gaura himself. The jewel amongst sages, Sanatana … Continue reading Srila Sanatana Goswami


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श्रीवास पण्डित

“पंचतत्त्वात्माकं कृष्णं भक्तरूप स्वरूपकम् । भक्तावतारं भक्ताख्यं नमामि भक्त शक्तिकम् ॥” (श्रीस्वरूप दामोदर गोस्वामी के कड़चा से उद्धृत) पंचतत्त्वात्मक श्रीकृष्ण को अर्थात् श्रीकृष्ण के (1) भक्तरूप,(2) भक्त स्वरूप, (3) भक्तावतार, (4) भक्त और (5) भक्त शक्ति को मैं प्रणाम करता हूँ ।     शक्तिमान वस्तु पाँच विभिन्न प्रकार के लीला परिचय से इन पाँच तत्वों … Continue reading श्रीवास पण्डित


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श्री वक्रेश्वरपण्डित

श्री कृष्ण लीला में चक्रव्यूह के अन्तर्गत जो  अनिरुद्ध हैं, वे ही गौर लीला में श्री वक्रेश्वरपण्डित के रूप में आविर्भूत हुए। श्री राधिका जी की प्रिय सखी शशि रेखा भी श्री वक्रेश्वरपण्डित के अन्तर्प्रविष्ट हैं। बहुत से लोगों का कहना है कि त्रिवेणी के निकट गुप्तिपाड़ा में ही श्री वक्रेश्वरपण्डित का आविर्भाव स्थान है। … Continue reading श्री वक्रेश्वरपण्डित


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श्री श्रीधर पंडित

श्री श्रीधर पंडित श्रीकृष्ण लीला में जो द्वादश गोपालों के अन्यतम कुसुमासव गोपाल थे, वे ही श्री गौर लीला की पुष्टि के लिए श्रीधर पंडित के रूप में आविर्भूत हुए थे― “खोलावेचातया ख्यात: पण्डित: श्रीधरे द्विज:। आसीद् ब्रजे हास्यकरो यो नाम्ना कुसुमासव:॥” (गौ. ग. दी. 133 श्लोक) श्रीधर पंडित नवदीपवासी थे। नौ द्वीपों के समुदाय … Continue reading श्री श्रीधर पंडित


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श्रील बलदेव विद्याभूषण

श्रील बलदेव विद्याभूषण प्रभु जी के आविर्भाव के समय और स्थान के सम्बन्ध में निश्चित रूप से कुछ नहीं जाना जाता। ऐतिहासिक लोग महापुरुषों के स्थान, समय के निर्धारण के सम्बन्ध में ध्यान दें तो इन सब विषयों का अभाव दूर हो सकता है। श्रील बलदेव विद्याभूषण प्रभु जी के पावन चरित्र के सम्बन्ध में … Continue reading श्रील बलदेव विद्याभूषण


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श्रीजीव गोस्वामी

गौर गणोद्देश दीपिका के 195-वें श्लोक में इस प्रकार वर्णन है कि श्रीकृष्ण लीला में जो विलास मंजरी हैं, वे ही गौर लीला की उपशाखा रूप से श्रील जीव गोस्वामी रूप से आविर्भूत हुई हैं। इसी ग्रन्थ के 203-वें श्लोक में लिखा है — “सुशील: पण्डित: श्रीमान् जीव: श्रीबल्लभात्मज:।”  श्रीगौड़ीय वैष्णव अभिधानानुसार श्रीजीव गोस्वामी जी … Continue reading श्रीजीव गोस्वामी


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श्रीपाद जगबन्धु भक्तिरंजन प्रभु

कलकत्ता बागबाजार स्थित श्रीगौड़ीय मठ प्रकाशित होने पर कलकत्ता निवासी श्रीयुक्त जगबन्धु दत्त महाशय कुछ दिनों से गौड़ीय मठ में आते रहे थे। प्रथम उन्होंने अभिज्ञ विषयी के दृष्टि से मठ के विभिन्न कार्य आदि का दर्शन करते थे। एक दिन श्रीपाद अनन्त वासुदेव प्रभु से कहा- जीवन में बहुत स्थानों पर वैष्णव का बहुत … Continue reading श्रीपाद जगबन्धु भक्तिरंजन प्रभु


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ठाकुर श्रीसारंग दास

      “व्रजे नान्दीमुखी यासीत् साद्य, सारंग ठकुर:।      प्रह्लादो मन्यते कैश्चिन्मत पित्रा, स न मन्यते॥” (गौ.ग.दी.172)     श्रीशिवानन्द सेन के कनिष्ठ पुत्र कवि कर्णपुर जी ने स्वरचित श्रीगौर गणोद्देश दीपिका में इस प्रकार लिखा है – ब्रज में जो नान्दीमुखी थे, वही अब सारंग ठाकुर हैं। कोई-कोई महात्मा इन्हें प्रह्लाद कह कर मानते हैं … Continue reading ठाकुर श्रीसारंग दास


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20 - अक्टूबर, शनिवार - 218
एकादशी से शुरू होने वाले कार्तिक व्रत व दामोदर व्रत तथा नियम सेवा व्रत एवं चातुर्मास व्रत के चौथे महीने का शुभारम्भ। पाशांकुशा एकादशी उपवास। (द्वादशी समय – शनिवार सायं 6.32 से रविवार रात्रि 8.07 तक, तुलसी चयन निषेद)

24 - अक्टूबर, बुधवार - 2018
श्रीकृष्ण जी का शारदीय रासयात्रा। श्री मुरारीगुप्त जी का तिरोभाव। त्रिदण्डीस्वामी श्रीमद् भक्ति प्रज्ञान केशव गोस्वामी महाराज जी का तिरोभाव। पूर्णिमा। पूर्णिमा से प्रारम्भ होने वाले कार्तिक व्रत व दामोदर व्रत का शुभाआरम्भ।

4 - नवम्बर, शनिवार - 2018
श्रीरमा एकादशी उपवास। (द्वादशी समय – शनिवार रात्रि 2.41 से रविवार रात्रि 12.48 तक, तुलसी चयन निषेद)

19 - नवम्बर. सोमवार - 2018
उत्थान एकादशी उपवास। श्रीश्रील गौर किशोर दास बाबाजी महाराज जी का तिरोभाव। श्रीचैतन्य गौड़ीय मठ प्रतिष्ठान के प्रतिष्ठाता ॐ श्रीमद भक्ति दयित माधव गोस्वामी महाराज विष्णुपाद जी की 115वीं आविर्भाव तिथि पूजा l एकादशी से प्रारम्भ हुआ चातुर्मास व्रत तथा नियम सेवा व्रत समाप्त l (द्वादशी समय – सोमवार प्रातः 11.54 से मंगलवार दोपहर 12.37 तक, तुलसी चयन निषेद)

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