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क्या आत्मा-परमात्मा को किसी ने देखा है?

क्या आत्मा-परमात्मा को किसी ने देखा है?; मौलवी साहब का सन्देह निस्तारण/         भगवद्-दर्शन की योग्यता सन् 1947 में श्रील गुरुदेव जी ने ग्वालपाड़ा एवं कामरूप ज़िले के भक्तों के आमन्त्रण पर जिन-जिन स्थानों पर शुभ पदार्पण किया उनमें बिजनी, भाटिपाड़ा, हाउली व बरपेटा इत्यादि स्थान उल्लेखनीय हैं। हाउली में जो धर्म सभा … Continue reading क्या आत्मा-परमात्मा को किसी ने देखा है?


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कहाँ हैं तुम्हारे भगवान्: श्रील गुरुदेव जी का डा. सी.वी. रमन जी से कथोपकथन

[परमाराध्य श्रील गुरुदेव में विषयवस्तु को अतिशीघ्र ग्रहण करने एवं साथ-साथ उसका सदुत्तर देने की अलौकिक शक्ति कई स्थानों पर देखी गयी। वे आधुनिक युग के तार्किक मनुष्य को अति आधुनिक युक्ति और उदहारण के साथ समझाने की असाधारण क्षमता रखते थे। इसलिए जो भी उनके पास आते, वे ही उनके व्यक्तित्व से प्रभावित हो … Continue reading कहाँ हैं तुम्हारे भगवान्: श्रील गुरुदेव जी का डा. सी.वी. रमन जी से कथोपकथन


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भगवद्-प्राप्ति के लिए सुनिश्चित पथ-निर्देशन हेतु श्रील गुरुदेव जी के विविध संवाद (2)

सन् 1947 में ही श्रील गुरुदेव कलकत्ता के कालीघाट, 8 नं. हाजरा रोड़ पर स्थित मठ में अवस्थान करते थे। श्रीकृष्ण बल्लभ ब्रह्मचारीजी का, संसार त्याग करने के संकल्प से पहले, इसी मठ में ही श्रील गुरुदेवजी के साथ दूसरा साक्षात्कार हुआ था। श्रीकृष्ण बल्लभ ब्रह्मचारीजी ने श्रील गुरुदेवजी की महापुरुषोचित्त दिव्य कांति दर्शन करके, … Continue reading भगवद्-प्राप्ति के लिए सुनिश्चित पथ-निर्देशन हेतु श्रील गुरुदेव जी के विविध संवाद (2)


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भगवद्-प्राप्ति के लिए सुनिश्चित पथ-निर्देशन हेतु श्रील गुरुदेव जी के विविध संवाद (1)

भगवान् और माया: भगवद्-तत्त्व जिज्ञासु शिष्य का मार्गदर्शन [यह मार्मिक वार्तालाप एक भगवद्-तत्त्वजिज्ञासु शिष्य (श्रीकामाख्या चरण नामक नवयुवक) एवं आत्मदर्शी श्रील गुरुदेव (श्रील भक्ति दयित माधव गोस्वामी महाराज) के मध्य में घटित हुआ। श्रीकामाख्या चरण नश्वर देह और देह से सम्बन्धित व्यक्तियों के प्रति शोक-मोहादि की लीला करते हुए श्रील गुरु महाराजजी के समक्ष प्रस्तुत … Continue reading भगवद्-प्राप्ति के लिए सुनिश्चित पथ-निर्देशन हेतु श्रील गुरुदेव जी के विविध संवाद (1)


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यह जड़ जगत सांसारिक सुख पाने के लिए नहीं है अपितु अपने विवेक का उपयोग करने के लिए है!

यह जड़ जगत सांसारिक सुख पाने के लिए नहीं है अपितु अपने विवेक का उपयोग करने के लिए है! जैसा की हम सब जानते हैं कि कलयुग का प्रभाव दिन पर दिन बढ़ रहा है और इस बढ़ते हुए कलयुग में छल, कपट, कलह और पाखण्ड भी बढ़ रहा है| इस बढ़ते हुए छल कपट … Continue reading यह जड़ जगत सांसारिक सुख पाने के लिए नहीं है अपितु अपने विवेक का उपयोग करने के लिए है!


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दुखों के मूल कारण के विषय पर

दुखों के मूल कारण के विषय पर श्री चैतन्य गौड़ीय मठ के वर्तमान आचार्य श्री श्रीमद भक्ति बल्लभ तीर्थ गोस्वामी महाराज जी !   हम बंधन में हैं और हमें तीन प्रकार के ताप सता रहे हैं; इस बात से सिद्ध होता हैं कि हम भगवान श्रीकृष्ण से विमुख हो गए है | हमारे दुखों … Continue reading दुखों के मूल कारण के विषय पर


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श्रेष्ठतम साधन

श्रेष्ठतम साधन मनुष्य जीवन ही एक ऐसा अनमोल जीवन है जिसमें भगवद् भक्ति करने का सर्वोत्तम सुयोग हैI मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जिसे सद्-असद् का बोध है व जो सद् वस्तु भगवान की आराधना करके सब कुछ, यहाँ तक कि पूर्णतम्-वस्तु श्रीकृष्ण को भी प्राप्त कर सकता हैI श्रीमद् भागवत् में चित्त को … Continue reading श्रेष्ठतम साधन


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Gopi-prema is highest

Our revered spiritual masters used to narrate one topic as an illustration to understand the highest pre-eminence of the gopis. Once, Sri Krishna displayed the pastime of having a severe headache in His palace at Dwaraka. At that time Sri Narada Muni came to meet Krishna and was perplexed to hear about His headache. Narada … Continue reading Gopi-prema is highest


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Video Conference


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13 नवम्बर, बुधवार
श्रीकात्यायनी व्रत आरम्भ। श्रीश्रील सुन्दरानन्द ठाकुर जी का तिरोभाव।

23 नवम्बर शनिवार
उत्पन्ना एकादशी-उपवास(एकादशी बिद्धा हेतु)। श्रील नरहरि सरकार ठाकुर का तिरोभाव। श्रील काला कृष्णदास जी (बड़गाछि) का तिरोभाव। (द्वादशी-शनिवार भोर 4.35 से शनिवार रात्रि 2.20 तक; तुलसी चयन निषेध)।

24 नवम्बर रविवार
प्रातः 9.36 से पहले पारण। गौरपार्षद श्रीश्रील सारंग ठाकुर का तिरोभाव।

2 दिसम्बर सोमवार
पुरी में श्रीश्रीजगन्नाथदेव की उड़न-षष्ठी। श्रीश्रील प्रभुपाद-अनुकम्पित त्रिदण्डिस्वामी श्रीमद् भक्ति स्वरूप दामोदर गोस्वामी महाराज जी का आविर्भाव।

8 दिसम्बर रविवार
मोक्षदा एकादशी-उपवास। (द्वादशी-रविवार प्रातः 7.28 से सोमवार प्रातः 9.02 तक; तुलसी चयन निषेध)।

9 दिसम्बर सोमवार
प्रात: 9.02 से पहले पारण।

12 दिसम्बर गुरुवार
पूर्णिमा। श्रीश्रील सच्चिदानन्द भक्तिविनोद ठाकुर- अनुकम्पित त्रिदण्डिस्वामी श्रीमद् भक्ति प्रदीप तीर्थ गोस्वामी महाराज जी का तिरोभाव।

16 दिसम्बर सोमवार
जगद्गुरु परमहंसस्वामी वैष्णवाचार्य कुल-शिरोमणि ॐ विष्णुपाद 108श्री श्रीमद् भक्ति सिद्धान्त सरस्वती गोस्वामी प्रभुपाद जी का 82वां विरह महोत्सव।

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