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  • सर्वमहागुणगण वैष्णव शरीरे। कृष्ण भक्ते कृष्णर गुण सकल संचारे। सेई सब गुण हय वैष्णव-लक्षण। सब कहा न याय करि दिग्दर्शन।। कृपालु, अकृत-द्रोह, सत्य-सार, सम। निर्दोष, वदान्य, मृदु, शुचि, अकिंचन।। सर्वोपकारक शांत, कृष्णैकशरण। अकाम, निरीह, स्थिर, विजित-षड्गुण। मित्भुक, अप्रमत, मानद, अमानी। गम्भीर, करुण, मैत्र, कवि, दक्ष, मौनी। कृष्ण भक्त के ये तमाम गुण हमें श्रील भक्ति विनोद ठाकुर जी के शुद्धभक्तिमय जीवन में परिपूर्ण रूप से प्रस्फुटित देखने को मिलते हैं। कृपालु, दयानिधि गौरहरि जी ने बद्ध जीवों पर जैसे नौ प्रकार से कृपा वर्षण की हैं, उनके निजजन श्रील भक्ति विनोद ठाकुर महाशय को भी वैसी ही दया को वितरण करते देखा जाता है।
  • श्रीअद्वैत आचार्य

    व्रजे आवेशरुपत्वाद्वयूहो योऽपि सदाशिवः। स एवाद्वैतगोस्वामी चैतन्याभिन्न विग्रहः॥ (गौ. ग. दी. 76) जो व्रज के आवरण रूप से नियुक्त है तथा जो सदाशिव व्यूह नाम से प्रसिद्ध है-वे ही अद्वैत गोस्वामी जी हैं। आप श्रीचैतन्य महाप्रभु जी से अभिन्न शरीर हैं। यश्र्च गोपालदेहः सन् व्रजे कृष्णस्य सन्निधौ। ननर्त्त श्रीशिवातन्त्रे भैरवस्य वचो यथा॥ एकदा कार्तिक मासि … Continue reading श्रीअद्वैत आचार्य


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    दिव्या हरिकथा वसंत पंचमी

    आज विशेष तिथि है। वसन्त ऋतु में आने वाली माघ महीने की पंचमी तिथि को वसन्त पंचमी कहते हैं। इस तिथि में सरस्वती पूजा होती है और इसी तिथि को अवलंबन करके गौरांग महाप्रभु की शक्ति, गौर-नारायण की शक्ति विष्णुप्रिया देवी का आविर्भाव हुआ। साथ ही आज महाप्रभु के अन्य अन्तरंग पार्षदों की भी तिथि … Continue reading दिव्या हरिकथा वसंत पंचमी


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    श्रील पुण्डरीक विद्यानिधि

    वृषभानुतनया ख्यातः पुरा यो व्रजमण्डले। अधुना पुण्डरीकाक्षो विद्यानिधि महाशयः॥ स्वकीय भावमास्वाद्य- राधा विरह कातरः। चैतन्यः पुण्डरीकाक्षमये तातावदत् स्वयम्॥ प्रेमनिधितया ख्यातिं गौरो यस्मै ददौ सुखी। माधवेन्द्रस्य शिष्यत्वात् गौरवञ्च सदाकरोत्॥ तत्प्रकाशविशेषोऽपिमिश्रः श्रीमाधवो मतः। रत्नावतीतु तत्पत्नी कीर्त्तिदा कीर्त्तिता बुधैः॥ (गौ. ग. दी. 54-57) अर्थात् पहले जो व्रजमण्डल में वृषभानु रूप से विख्यात थे, वही महाशय इस समय श्रीचैतन्य … Continue reading श्रील पुण्डरीक विद्यानिधि


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    श्रीविष्णु प्रिय देवी

    श्रीसनातनमिश्रोऽयं पुरा सत्राजितो नृपः। विष्णुप्रिया जगन्माता यत् कन्या भू-स्वरूपिणी॥ (गौ.ग.दी. 47) पूर्वकाल में जो राजा सत्राजित थे, वही दूसरे जन्म में श्रीसनातन मिश्रा नाम से पैदा हुए हैं। जगन्माता भूस्वरूपिणी-विष्णु प्रिय जी, उन्हीं की कन्या हैं। यदुवंश के राजा सत्राजित की कन्या सत्यभामा से श्रीकृष्ण ने विवाह किया था। गौरलीला में राजा सत्राजित श्रीसनातन मिश्र … Continue reading श्रीविष्णु प्रिय देवी


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    भक्तों की भावना ही उनके लिए सर्वोपरि है

    मई २०१० में, पंजाब से कुछ भक्त कोलकाता आए और उन्होंने श्रील गुरुदेव से प्रचार के लिए उत्तर भारत आने का अनुरोध किया। पहले, श्रील गुरुदेव प्रचार के लिए उत्तर भारत में वर्ष में कम से कम ४-५ महीने बिताते थे। किन्तु पिछले पांच वर्षों से वे उत्तर भारत के क्षेत्रों में (चिकित्सक से परामर्श करने के लिए नई दिल्ली और चंडीगढ़ के अतिरिक्त) नहीं गए। पंजाब में कई भक्त उनके दर्शन के लिए अतिशय उत्सुक थे।


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    कृष्ण नाम और कृष्ण मन्त्र

    -कृष्ण नाम और कृष्ण मन्त्र सर्वोत्तम होते हुए भी कृष्ण नाम में अपराध का विचार है। श्रीकृष्ण नाम के आभास से करोड़ों-करोड़ों जन्मों के पाप ध्वंस हो जाते हैं व मुक्ति प्राप्त होती है – ये सत्य है। किन्तु अपराध रहने से नामाभास भी नहीं होता। अपराधी पर कभी श्रीकृष्ण ने कृपा नहीं की। :- श्रील … Continue reading कृष्ण नाम और कृष्ण मन्त्र


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    श्रील रघुनाथ दास गोस्वामी

    दास श्रीरघुनाथस्य पूर्वाख्या रस मंजरी। अमुं केचित् प्रभाषंते श्रीमती रति मंजरीम्।। भानुमत्याख्या केचीदाहुस्तं नाम भेदत :।। (गौ.ग.दी. १८६)            कृष्णा लीला में जो रस मंजरी, मतान्तर में रति मंजरी अथवा भानुमती (सखी परिचारिका दुती) हैं, श्रीगौर लीला में वे ही श्रीरघुनाथ दास गोस्वामी के रूप में प्रकट हुई हैं।           अनुमानत : शक सम्वत् १४१६में … Continue reading श्रील रघुनाथ दास गोस्वामी


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    श्रील रघुनन्दन ठाकुर

    श्रील रघुनन्दन ठाकुर व्यूहस्तृतीय: प्रद्युम्न: प्रियनर्म सखो¿भवत् । चक्रे लीला सहायं यो राधा माधवयोर्व्रजे । श्रीचैतन्याद्वैत तनु: स एव रघुनन्दन: । (गौर. ग. 70) प्रद्युम जी तृतीय व्यूह के हैं। इन्होंने कृष्ण के प्रियनर्म सखा होकर व्रज में श्रीराधामाधव जी की लीला में सहायता की थी। वे प्रद्युम जी ही इस समय श्रीचैतन्य के अभिन्न … Continue reading श्रील रघुनन्दन ठाकुर


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    Video Conference


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    26 जनवरी गुरुवार बसंत पंचमी ।
    गौर-शक्ति श्रीविष्णुप्रिया देवी जी का आविर्भाव। सरस्वती पूजा। श्रील पुण्डरीक विद्यानिधि, श्रीलरघुनाथ दास गोस्वामी एवं श्रील रघुनन्दन ठाकुर जी का आविर्भाव। श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर जी का तिरोभाव। श्रीश्रील प्रभुपादनुकम्पित त्रिदण्डिस्वामी श्रीमद् भक्ति विवेक भारती गोस्वामी महाराज जी तथा त्रिदण्डिस्वामी श्रीमद् भक्ति स्वरूप पर्वत गोस्वामी महाराज जी का तिरोभाव। पूज्यपाद त्रिदण्डिस्वामी श्रीमद् भक्ति कमल गोविन्द महाराज जी का आविर्भाव।

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