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साधन भजन में अधिकार प्राप्त करने का उपाय और योग्यता

गुरु-वैष्णवगण परम दयालु हैं, उनकी अहेतुकी कृपा नि:स्वार्थ स्नेह ही जीव को भजन राज्य में अग्रसर कराने में समर्थ है। उनकी करुणा और शुभाशीष मनुष्य का विशेष साधन-सम्पद है। श्री भागवत के श्लोक में वज्र के समान कठोर पाषाण-हृदय, श्रीनाम ग्रहण द्वारा द्रवीभूत हो जाता है एवं अष्टसात्विक विकार आदि श्री नामाश्रयी के विशेष लक्षण … Continue reading साधन भजन में अधिकार प्राप्त करने का उपाय और योग्यता


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वात्सल्य रस से श्री विग्रह की सेवा करणीय

मां यदि अपनी संतान रूपी ठाकुर जी को शाम 4:00 बजे उबले हुए चावल खिलाकर अर्थात् भोग लगाकर संतुष्ट होती है तो ठाकुर या श्रीमूर्ति, कर भी क्या सकते हैं? सभी तो चौबे ब्राह्मण के नित्य- सेव्य विग्रह- श्रीमदनमोहन जिउ नहीं है? यह ब्राह्मणी की तरह संतान-वत्सला या स्नेहमयी नहीं बनेगी न? वात्सल्य-रस में श्रीविग्रह … Continue reading वात्सल्य रस से श्री विग्रह की सेवा करणीय


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भगवान् की आराधना के लिये भगवद्-त्तत्व को समझने की ज़रूरत है।

आसाम प्रचार-भ्रमण के समय श्रील गुरु महाराज जी गोहाटी में कुछ दिन रहे। उस समय आसाम के तत्कालीन मुख्यमन्त्री श्री गोपीनाथ बड़दलई जी के निवास पर भागवत पाठ की व्यवस्था हुई थी। श्रीगुरु महाराज जी के श्रीमुख से शुद्ध भक्ति सिद्धान्त सम्मत एवं सुयुक्तिपूर्ण श्रीमद् भागवत की अपूर्व ह्रदयग्राही व्याख्या सुनकर सभी श्रोता मुग्ध हो … Continue reading भगवान् की आराधना के लिये भगवद्-त्तत्व को समझने की ज़रूरत है।


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साधुसंग से भगवद्-तत्त्व की उपलब्धि

[कोलकाता स्थित मठ में श्रीकृष्ण-जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में आयोजित धर्म सभा में श्रील गुरुदेव जी की उपदेशवाणी का सारमर्म] श्रीकृष्ण की आराधना का वैशिष्ट्य समझने के लिये अच्छी तरह से ये जानना आवश्यक है कि श्रीकृष्ण कौन हैं, उनका स्वरूप क्या है? उनके व्यक्तित्व के ऊपर उनकी आराधना का वैशिष्ट्य निर्भर करता है। ‘कृष्ण’ शब्द … Continue reading साधुसंग से भगवद्-तत्त्व की उपलब्धि


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क्या आत्मा-परमात्मा को किसी ने देखा है?

क्या आत्मा-परमात्मा को किसी ने देखा है?; मौलवी साहब का सन्देह निस्तारण/         भगवद्-दर्शन की योग्यता सन् 1947 में श्रील गुरुदेव जी ने ग्वालपाड़ा एवं कामरूप ज़िले के भक्तों के आमन्त्रण पर जिन-जिन स्थानों पर शुभ पदार्पण किया उनमें बिजनी, भाटिपाड़ा, हाउली व बरपेटा इत्यादि स्थान उल्लेखनीय हैं। हाउली में जो धर्म सभा … Continue reading क्या आत्मा-परमात्मा को किसी ने देखा है?


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यह जड़ जगत सांसारिक सुख पाने के लिए नहीं है अपितु अपने विवेक का उपयोग करने के लिए है!

यह जड़ जगत सांसारिक सुख पाने के लिए नहीं है अपितु अपने विवेक का उपयोग करने के लिए है! जैसा की हम सब जानते हैं कि कलयुग का प्रभाव दिन पर दिन बढ़ रहा है और इस बढ़ते हुए कलयुग में छल, कपट, कलह और पाखण्ड भी बढ़ रहा है| इस बढ़ते हुए छल कपट … Continue reading यह जड़ जगत सांसारिक सुख पाने के लिए नहीं है अपितु अपने विवेक का उपयोग करने के लिए है!


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विष्णु-वैष्णव सेवा ही परम धन है

‘ध्रुवानन्द’ नामक एक उदासीन वैष्णव एक बार पुरुषोत्तम क्षेत्र में गए थे। वहाँ पहुँच कर उन्हें श्रीजगन्नाथ देव को अपने हाथ से बनाकर भोग लगाने की प्रबल इच्छा हुई। श्रीजगन्नाथ देव ने स्वप्न में उनको गंगा किनारे “माहेश” नामक स्थान पर जाकर उनकी (श्रीजगन्नाथ की) प्रतिष्ठा कर अपने हाथ से रसोई करके भोग लगाने का … Continue reading विष्णु-वैष्णव सेवा ही परम धन है


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अपने दोषों का अनुभव

जब तक हम अपने भौतिक अहंकार को नहीं छोड़ेंगे, तब तक अपने जागतिक अभिमान एवं अपने दोषों को नष्ट करना हमारे लिए सम्भव नहीं होगा। स्वरूप-भ्रम ही जागतिक अभिमान की वृद्धि, धोखा देने की वृत्ति एवं इसी प्रकार के अन्य दोषों का मूल कारण है। बद्ध जीव के लिए सांसारिक अभिमान को छोड़ना आसान नहीं … Continue reading अपने दोषों का अनुभव


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07 - मार्च - गुरुवार
वैष्णव सार्वभौम श्रीजगन्नाथदास बाबा जी महाराज तथा श्रीरसिकानन्द देव गोस्वामी जी का तिरोभाव। श्रीचैतन्य गौड़ीय मठ प्रतिष्ठान के प्रतिष्ठाता श्रीमद् भक्ति दयित माधव गोस्वामी महाराज जी का 40 वां वार्षिक विरह महोत्सव l

15 मार्च शुक्रवार
श्रीनवद्वीप धाम परिक्रमा आरम्भ।

17 मार्च रविवार
आमलकी एकादशी उपवास। (द्वादशी समय – रविवार सायं 4.49 से सोमवार दोपहर 2.28 तक, तुलसी चयन निषेद)

18 मार्च सोमवार
प्रातः 9.47 से पहले पारण l श्री माधवेन्द्रपुरिपाद जी का तिरोभाव l

21 मार्च गुरुवार
श्रीगौर जयन्ती उपवास। श्रीश्री राधा गोविन्द जी का बसन्त दोलोत्सव।

22 मार्च शुक्रवार
प्रातः 9.45 से पहले पारण l श्री जगन्नाथ मिश्र जी का आन्दोत्सव l

01 अप्रैल सोमवार
उन्मिलिनी महाद्वादशी उपवास l

02 अप्रैल मंगलवार
प्रातः 8.39 से पहले पारण l श्री चैतन्य महाप्रभु जी का वराह नगर में शुभ पदार्पण l श्री गोविन्द घोस ठाकुर जी का तिरोभाव l

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