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साधन भजन में अधिकार प्राप्त करने का उपाय और योग्यता

गुरु-वैष्णवगण परम दयालु हैं, उनकी अहेतुकी कृपा नि:स्वार्थ स्नेह ही जीव को भजन राज्य में अग्रसर कराने में समर्थ है। उनकी करुणा और शुभाशीष मनुष्य का विशेष साधन-सम्पद है। श्री भागवत के श्लोक में वज्र के समान कठोर पाषाण-हृदय, श्रीनाम ग्रहण द्वारा द्रवीभूत हो जाता है एवं अष्टसात्विक विकार आदि श्री नामाश्रयी के विशेष लक्षण … Continue reading साधन भजन में अधिकार प्राप्त करने का उपाय और योग्यता


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श्रीजीव गोस्वामी

गौर गणोद्देश दीपिका के 195-वें श्लोक में इस प्रकार वर्णन है कि श्रीकृष्ण लीला में जो विलास मंजरी हैं, वे ही गौर लीला की उपशाखा रूप से श्रील जीव गोस्वामी रूप से आविर्भूत हुई हैं। इसी ग्रन्थ के 203-वें श्लोक में लिखा है — “सुशील: पण्डित: श्रीमान् जीव: श्रीबल्लभात्मज:।”  श्रीगौड़ीय वैष्णव अभिधानानुसार श्रीजीव गोस्वामी जी … Continue reading श्रीजीव गोस्वामी


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श्रीपाद जगबन्धु भक्तिरंजन प्रभु

कलकत्ता बागबाजार स्थित श्रीगौड़ीय मठ प्रकाशित होने पर कलकत्ता निवासी श्रीयुक्त जगबन्धु दत्त महाशय कुछ दिनों से गौड़ीय मठ में आते रहे थे। प्रथम उन्होंने अभिज्ञ विषयी के दृष्टि से मठ के विभिन्न कार्य आदि का दर्शन करते थे। एक दिन श्रीपाद अनन्त वासुदेव प्रभु से कहा- जीवन में बहुत स्थानों पर वैष्णव का बहुत … Continue reading श्रीपाद जगबन्धु भक्तिरंजन प्रभु


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ठाकुर श्रीसारंग दास

      “व्रजे नान्दीमुखी यासीत् साद्य, सारंग ठकुर:।      प्रह्लादो मन्यते कैश्चिन्मत पित्रा, स न मन्यते॥” (गौ.ग.दी.172)     श्रीशिवानन्द सेन के कनिष्ठ पुत्र कवि कर्णपुर जी ने स्वरचित श्रीगौर गणोद्देश दीपिका में इस प्रकार लिखा है – ब्रज में जो नान्दीमुखी थे, वही अब सारंग ठाकुर हैं। कोई-कोई महात्मा इन्हें प्रह्लाद कह कर मानते हैं … Continue reading ठाकुर श्रीसारंग दास


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श्रील नरोतम ठाकुर

श्रील नरोतम ठाकुर जी कृष्ण लीला में चम्पक मंजरी हैं । ये उनका सिद्ध परिचय हैं । श्री कृष्ण लीला की नित्यपार्षदा श्री रूप मंजरी की अनुगता चम्पक मंजरी जी हैं । जगत के जीवों का नित्य कल्याण करने के लिए नरोतम ठाकुर के रूप में आविर्भूत हुई थी । श्रील नरोतम ठाकुर जी राजसाही … Continue reading श्रील नरोतम ठाकुर


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क्या आत्मा-परमात्मा को किसी ने देखा है?

क्या आत्मा-परमात्मा को किसी ने देखा है?; मौलवी साहब का सन्देह निस्तारण/         भगवद्-दर्शन की योग्यता सन् 1947 में श्रील गुरुदेव जी ने ग्वालपाड़ा एवं कामरूप ज़िले के भक्तों के आमन्त्रण पर जिन-जिन स्थानों पर शुभ पदार्पण किया उनमें बिजनी, भाटिपाड़ा, हाउली व बरपेटा इत्यादि स्थान उल्लेखनीय हैं। हाउली में जो धर्म सभा … Continue reading क्या आत्मा-परमात्मा को किसी ने देखा है?


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कहाँ हैं तुम्हारे भगवान्: श्रील गुरुदेव जी का डा. सी.वी. रमन जी से कथोपकथन

[परमाराध्य श्रील गुरुदेव में विषयवस्तु को अतिशीघ्र ग्रहण करने एवं साथ-साथ उसका सदुत्तर देने की अलौकिक शक्ति कई स्थानों पर देखी गयी। वे आधुनिक युग के तार्किक मनुष्य को अति आधुनिक युक्ति और उदहारण के साथ समझाने की असाधारण क्षमता रखते थे। इसलिए जो भी उनके पास आते, वे ही उनके व्यक्तित्व से प्रभावित हो … Continue reading कहाँ हैं तुम्हारे भगवान्: श्रील गुरुदेव जी का डा. सी.वी. रमन जी से कथोपकथन


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भगवद्-प्राप्ति के लिए सुनिश्चित पथ-निर्देशन हेतु श्रील गुरुदेव जी के विविध संवाद (2)

सन् 1947 में ही श्रील गुरुदेव कलकत्ता के कालीघाट, 8 नं. हाजरा रोड़ पर स्थित मठ में अवस्थान करते थे। श्रीकृष्ण बल्लभ ब्रह्मचारीजी का, संसार त्याग करने के संकल्प से पहले, इसी मठ में ही श्रील गुरुदेवजी के साथ दूसरा साक्षात्कार हुआ था। श्रीकृष्ण बल्लभ ब्रह्मचारीजी ने श्रील गुरुदेवजी की महापुरुषोचित्त दिव्य कांति दर्शन करके, … Continue reading भगवद्-प्राप्ति के लिए सुनिश्चित पथ-निर्देशन हेतु श्रील गुरुदेव जी के विविध संवाद (2)


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20 - अक्टूबर, शनिवार - 218
एकादशी से शुरू होने वाले कार्तिक व्रत व दामोदर व्रत तथा नियम सेवा व्रत एवं चातुर्मास व्रत के चौथे महीने का शुभारम्भ। पाशांकुशा एकादशी उपवास। (द्वादशी समय – शनिवार सायं 6.32 से रविवार रात्रि 8.07 तक, तुलसी चयन निषेद)

24 - अक्टूबर, बुधवार - 2018
श्रीकृष्ण जी का शारदीय रासयात्रा। श्री मुरारीगुप्त जी का तिरोभाव। त्रिदण्डीस्वामी श्रीमद् भक्ति प्रज्ञान केशव गोस्वामी महाराज जी का तिरोभाव। पूर्णिमा। पूर्णिमा से प्रारम्भ होने वाले कार्तिक व्रत व दामोदर व्रत का शुभाआरम्भ।

4 - नवम्बर, शनिवार - 2018
श्रीरमा एकादशी उपवास। (द्वादशी समय – शनिवार रात्रि 2.41 से रविवार रात्रि 12.48 तक, तुलसी चयन निषेद)

19 - नवम्बर. सोमवार - 2018
उत्थान एकादशी उपवास। श्रीश्रील गौर किशोर दास बाबाजी महाराज जी का तिरोभाव। श्रीचैतन्य गौड़ीय मठ प्रतिष्ठान के प्रतिष्ठाता ॐ श्रीमद भक्ति दयित माधव गोस्वामी महाराज विष्णुपाद जी की 115वीं आविर्भाव तिथि पूजा l एकादशी से प्रारम्भ हुआ चातुर्मास व्रत तथा नियम सेवा व्रत समाप्त l (द्वादशी समय – सोमवार प्रातः 11.54 से मंगलवार दोपहर 12.37 तक, तुलसी चयन निषेद)

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